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अखिलेश यादव ने पिछड़ी जातियों को उनका हक और सम्मान दिलाने के लिए जाति गणना की पैरवी की

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जींद (हरियाणा), 19 नवंबर ( ए) उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने जातिगत गणना की जरूरत बताते हुए रविवार को यहां कहा कि देश में कई ऐसी जातियां हैं जिनकी गिनती मुख्य धारा तक में नहीं होती है तथा कई ऐसी जातियां हैं जिनकी आजतक पहचान नहीं हो सकी है।.

महम से विधायक बलराज कुंडू द्वारा एकलव्य स्टेडियम में आयोजित जनसेवा संकल्प रैली को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि विपक्षी दलों के गठबंधन ‘ इंडिया’ की अगले साल लोकसभा चुनाव में जीत हो इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। सपा विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ का हिस्सा है।.कुंडू ने कुछ महीने पहले हरियाणा जनसेवक पार्टी के नाम से अलग दल बनाया है। यह घटनाक्रम अगले साल हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सामने आया है। हरियाणा में भाजपा-जेजेपी गठबंधन की सरकार है

यादव ने कहा कि उनकी पार्टी यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना जारी रखेगी कि पिछड़ी जातियों और वर्गों के लोगों को उनका अधिकार और सम्मान मिले।

सपा मुखिया ने कहा, ” …आज पूरा देश जाति गणना चाहता है क्योंकि आजादी के इतने वर्षों के बाद भी कई पिछड़े लोग हैं जिनकी गिनती नहीं हो पाई और हम उन्हें मुख्यधारा में नहीं ला सके। ”

उन्होंने कहा, ” देश में कई जातियां ऐसी हैं जिनकी पहचान नहीं हो सकी है। इसीलिए (जाति गणना की) जो आवाज कभी उत्तर प्रदेश से उठाई जाती थी, वह आज बिहार में गूंज रही है। हम जानते हैं कि हरियाणा के लोग भी इसे (जाति गणना) चाहते हैं।”

यादव ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी देश में जातिगत गणना सुनिश्चित कराएगी ताकि गुमनाम जातियों को भी सम्मान और अधिकार मिल सके।

कांग्रेस भी जातिगत गणना की मांग कर रही है और उसने केंद्र में सत्ता में आने पर सर्वेक्षण कराने का वादा किया है। बिहार में नीतीश कुमार नीत जनता दल(यू) सरकार जातिगत सर्वेक्षण के आंकड़ों को 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ही जारी करा चुकी है।

यादव ने जवानों की भर्ती की योजना अग्रिनवीर को लेकर कहा कि लोकसभा चुनाव घोषणापत्र में सरकार इस योजना को समाप्त करने के वादे को भी शामिल करेगी।

उन्होंने कहा कि अगर समाजवादियों को मौका मिला तो ‘अग्रिवीर व्यवस्था’ को समाप्त किया जाएगा और फौज में भर्ती की पहले जैसी व्यवस्था होगी ।

वहीं, गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने आरोप लगाया कि अगले साल होने वाले आम चुनाव की निष्पक्षता पर प्रश्र चिन्ह लगा है, क्योंकि चुनाव में उच्चतम न्यायालय और चुनाव आयोग का निष्पक्ष होना जरूरी है लेकिन ऐसा नहीं है।

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