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नेहरू के प्रगतिवादी विचारों ने भारत की सामाजिक और आर्थिक प्रगति को आगे बढ़ाया: कांग्रेस

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नयी दिल्ली, 14 नवंबर (ए) कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने मंगलवार को भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें आधुनिक भारत का प्रमुख वास्तुकार बताया।.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष अजय माकन सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने यहां शांति वन में नेहरू के स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।.

पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘पंडित जवाहर लाल नेहरू एक सोच हैं – स्वतंत्रता की, प्रगति की, न्याय की। भारत माता को आज अपने ‘हिंद के जवाहर’ के इन्हीं मूल्यों की ज़रूरत है, एक विचारधारा की तरह, हर दिल में।’’

खरगे ने एक पोस्ट में कहा, ‘‘पंडित जवाहरलाल नेहरू आधुनिक भारत के प्रमुख वास्तुकार थे। उनके अनुसार, केवल वही लोकतांत्रिक संरचना भारत को एक साथ रख सकती है जो विभिन्न सांस्कृतिक, राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक प्रवृत्तियों को खुद को व्यक्त करने के लिए जगह देती हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आज, जब हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए शांति वन में एकत्र हो रहे हैं, हमें भारत के संविधान और हमारे लंबे समय से पोषित लोकतांत्रिक संस्थानों और सिद्धांतों व उनकी स्थायी विरासत को संरक्षित व सुरक्षित करना चाहिए।’’

हिंदी में एक अन्य पोस्ट में, खरगे ने नेहरू के शब्दों को याद किया, जिन्होंने कहा था, ‘‘नागरिकता, देश की सेवा में होती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत को शून्य से शिखर तक पहुंचाने वाले, आधुनिक भारत के निर्माता, लोकतंत्र के निर्भीक प्रहरी व हमारे प्रेरणास्रोत, पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। उनके प्रगतिशील विचारों ने तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाया और हर पल देश की जनता को बिना किसी भेदभाव के, हमेशा देश को आगे रखकर, साथ मिलकर रहने के लिए प्रोत्साहित किया।’’

नेहरू को उनकी 134वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने नेहरू के ‘सौम्य व्यक्तित्व’ को याद किया जिन्होंने 20वीं सदी के भारत को निर्णायक रूप से आकार दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘जहां उनकी विरासत जीवित है और सदा हमारे इर्द-गिर्द गूंजती रहती है, वहीं स्वयंभू ‘विश्वगुरु’ और उनके ढिंढोरा पीटने वाले, नेहरू जी के महान योगदान को नकारने और उन्हें विकृत करने, नुकसान पहुंचाने, अपमानित करने और बदनाम करने के लिए हर संभव प्रयास करते रहते हैं।’’

रमेश ने कहा कि आज जब देश पांच दिन बाद क्रिकेट विश्व कप फाइनल में भारत की जीत का इंतजार कर रहा है, तो आइए, हम क्रिकेटर नेहरू को याद करें।उन्होंने कहा कि 12 और 13 सितंबर, 1953 को प्रधानमंत्री एकादश ने विभिन्न राज्यों में बाढ़ राहत के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से नयी दिल्ली में उपराष्ट्रपति एकादश के खिलाफ दो दिवसीय मैच खेला था।

रमेश ने कहा कि नेहरू पूरे समय मैदान पर रहे तथा उन्होंने गेंदबाजी, क्षेत्ररक्षण और बल्लेबाजी की।

उन्होंने कहा, ‘‘नेहरू ने खेल के दौरान कुछ मिनट के लिए रेडियो पर बोलने का समय निकाला। बाद में, उन्होंने नवंबर 1948 में वेस्टइंडीज और भारतीय क्रिकेट टीमों द्वारा उन्हें प्रस्तुत क्रिकेट बैट और स्कोर बुक बेचने वाले नीलामीकर्ता के रूप में कार्य किया।’’

उन्होंने उस समय की एक खबर का हवाला देते हुए याद किया, ‘‘सौभाग्य से, इन मौकों पर उन्होंने हिंदी में जो कुछ कहा, वह भावी पीढ़ी के लिए कैद हो गया। वे आज भी अद्भुत हैं।’’

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