नयी दिल्ली: पांच नवंबर (ए) उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने मंगलवार को निजी संपत्तियों से संबंधित फैसले के दौरान भारत के प्रधान न्यायाधीश ( सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ की ओर से की गई उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई जिसमें कहा गया है कि न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्णा अय्यर सिद्धांत ने संविधान की व्यापक और लचीली भावना का ‘अहित’ किया।
