उच्च न्यायालय ने कहा- मां और शिशु के बीच राष्ट्रीयता नहीं आने दें, रूसी महिला को दी राहत

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मुंबई, 17 जुलाई (ए) बंबई उच्च न्यायालय ने अपने भारतीय पति से तलाक के बाद देश छोड़ने के लिए जारी निकास परमिट को चुनौती देने वाली एक रूसी महिला की याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के रुख पर नाराजगी व्यक्त की।.

रूसी महिला (38) ने अपनी याचिका में दावा किया कि उसने भारतीय व्यक्ति से दूसरी शादी की है और उससे उसकी छह महीने की बेटी है। महिला का उसकी पिछली शादी से एक नाबालिग बेटा है।.न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने सोमवार को कहा कि एक महिला, जो अभी भी अपने बच्चे को दूध पिला रही है, उसे उसकी राष्ट्रीयता के कारण शिशु से अलग नहीं किया जाना चाहिए।

अदालत ने टिप्पणी की कि अधिकारियों को विशेष परिस्थितियों को देखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था।

न्यायमूर्ति पटेल ने कहा, ‘‘शासन का यह विचार कि सभी नागरिकों को संदिग्ध माना जाता है, उचित नहीं है। समझदार बनें और महिला और उसके बच्चे के प्रति मानवीय दृष्टिकोण रखें। राष्ट्रीयता को इसके आड़े न आने दें। हम एक मिनट के लिए भी उन्हें अलग होने की अनुमति नहीं देंगे। यदि यह मां के लिए कोई विशेष परिस्थिति नहीं है, तो (आपके तर्क में) कुछ भी नहीं है।’’

केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर स्थानीय पुलिस ने जनवरी 2023 में महिला को निकास परमिट जारी किया और मार्च तक देश छोड़ने को कहा था। महिला ने इस निकास परमिट के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था जिसने इसकी अवधि बढ़ा दी थी।

महिला की पहली शादी एक भारतीय नागरिक से हुई थी और उसने एक्स1 वीजा और ‘ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया’ (ओसीआई) कार्ड हासिल किया था। बाद में, जोड़ा अलग हो गया और महिला ने तलाक की सहमति दे दी। महिला का पहले पति से एक बेटा है।

तलाक के बाद, महिला ने दूसरी शादी की जिससे उसे एक बेटी है। महिला ने पांच मार्च को अपनी दूसरी शादी के आधार पर ओसीआई कार्ड की वैधता कायम रखने के लिए आवेदन किया था।महिला ने याचिका पर सुनवाई लंबित होने तक पुलिस को निकास परमिट की अवधि बढ़ाने का निर्देश देने का अनुरोध अदालत से किया।