नयी दिल्ली: 30 सितंबर (ए) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में अवैध खनन करने वालों द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक प्रशिक्षु अधिकारी पर कथित हमले के मामले में पर्यावरण मंत्रालय सहित अन्य प्राधिकारों से जवाब मांगा है।
अधिकरण एक मामले की सुनवाई कर रहा था, जहां उसने मुरादाबाद की सदर तहसील में संयुक्त मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात एक प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी पर अवैध खनन करने वालों द्वारा ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश के संबंध में अखबार की एक खबर का स्वत: संज्ञान लिया था।खबर में कहा गया कि अधिकारी अतिक्रमण रोधी अभियान के तहत क्षेत्र में अवैध खनन गतिविधियों पर अंकुश लगाने के प्रयासों की निगरानी कर रहे थे।
न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने 27 सितंबर को पारित एक आदेश में कहा, ‘‘खबर में दावा किया गया है कि अवैध रेत खनन कई वर्षों से ठाकुरद्वारा क्षेत्र में एक लगातार मुद्दा रहा है, जिससे अक्सर झड़पें होती हैं।’’
पीठ ने कहा, ‘‘कानूनी कार्रवाई पर खनन करने वाले अक्सर सीमा पार करके उत्तराखंड भाग जाते हैं। ये घटनाएं अवैध खनन गतिविधियों को रोकने में अधिकारियों के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करती हैं।’’
एनजीटी ने कहा कि खबर में रेत खनन संबंधी दिशानिर्देशों और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन का संकेत दिया गया है। अधिकरण ने कहा, ‘‘यह समाचार पर्यावरण मानदंडों के अनुपालन से संबंधित महत्वपूर्ण सवाल उठाता है।’’
इसमें उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी), उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सदस्य सचिवों के साथ-साथ केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय और मुरादाबाद के जिलाधिकारी सहित कई प्राधिकारों को पक्ष या प्रतिवादी के रूप में शामिल किया गया।
अधिकरण ने संबंधित पक्षों से सुनवाई की अगली तारीख 22 जनवरी से कम से कम एक सप्ताह पहले हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।